पेयजल
तथा स्वच्छता मंत्रालय के ध्यान में टीएजी (किशोरी) रिपोर्ट 2018
शीर्षक वाले सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कुछ मीडिया रिपोर्ट आई हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में दावा करने वाली ये रिपोर्टें पूरी तरह
भ्रामक हैं। सर्वेक्षण में दावा किया गया है कि देश में 40 प्रतिशत
किशोरियां अभी भी खुले में शौच के लिए जाती हैं।
लेकिन
मीडिया की इन रिपोर्टों में इस तथ्य को नहीं बताया गया है कि फील्ड
सर्वेक्षण 2016-17 में किये गये। इससे तथ्यात्मक रूप से गलत और भ्रामक
निष्कर्ष पर पहुंचा गया है कि यह सर्वेक्षण हाल में किया गया है और
सर्वेक्षण के निष्कर्ष जमीनी स्तर पर वर्तमान स्वच्छता स्थिति को
दर्शाते हैं। 2016-17 के डाटा का उपयोग करते हुए स्वच्छ भारत मिशन की
सफलता पर सवाल उठाने वाली रिपोर्टें देश की जनता के प्रयासों और उपलब्धियों
की अनदेखी करती है।
इस
गलती ने ग्रामीण स्वच्छता के संदर्भ में गंभीर दिशा ले ली है। स्वच्छ
भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण स्वच्छता में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
तथ्य यह है कि रिपोर्ट में फील्ड सर्वेक्षण की अवधि जैसे मूल विवरण को
स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है। यह रिपोर्ट आज के संदर्भ में
स्वच्छता की प्रगति के बारे में भ्रम पैदा करने वाली हो गई है।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत ग्रामीण स्वच्छता कवरेज परिणामस्वरूप अक्टूबर,
2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 95 प्रतिशत हो गया है। स्वच्छ भारत मिशन
के अंतर्गत तेज प्रगति का अर्थ यह है कि अध्ययनों और सर्वेक्षणों में
उपयोग किया गया डाटा कुछ ही महीनों के अंदर पुराने पड़ सकते हैं। फील्ड
सर्वेक्षण के मध्य में यानी जनवरी 2017 में ग्रामीण भारत में स्वच्छता
कवरेज 60 प्रतिशत से नीचे था, जोकि उस अवधि के लिए किये गये सर्वेक्षण के
तथ्यों के अनुरूप है। इस तथ्य को रिपोर्ट में प्रमुखता नहीं दी गई है।
इसलिए पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि
स्वच्छ भारत मिशन तेज प्रगति के साथ एक अत्यन्त गतिशील कार्यक्रम है।
शोधकर्ताओं और लेखकों को सलाह दी जाती है कि वे पुराने डाटा के आधार पर
कार्यक्रम की सफलता के बारे में कोई निर्णय देने से पहले पूरी सावधानी
बरतें। उन्हें यह भी सलाह दी जाती है कि वे स्पष्ट रूप से फील्ड
सर्वेक्षण की अवधि बतायें, अवधि तथा किसी अध्ययन के सांख्यिकीय महत्व को
बतायें ताकि उनके पाठकों में किसी तरह का भ्रम पैदा नहीं हो। संदेह की
स्थिति में पाठक नवीनतम तथ्यों तथा प्रगति आंकड़ों के लिए मंत्रालयों से
सम्पर्क कर सकते हैं। विभिन्न मीडिया को भी इसी तरह का परामर्श दिया जा
रहा है।
ग्रामीण भारत के घरों में 8.7 करोड़ से अधिक शौचालय बने हैं और 5 लाख से अधिक गांवों, 530 जिलों तथा 25 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों को अक्टूबर, 2018 में खुले में शौच से मुक्त घोषित किया गया है।
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